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Tuesday, August 3, 2021

राजस्थान: जयपुर-केरल से बढ़ रहे केसेज, राजस्थान में वैक्सीनेशन - टेस्टिंग की रफ्तार पड़ी धीमी

राजस्थान: जयपुर-केरल से बढ़ रहे केसेज, राजस्थान में वैक्सीनेशन - टेस्टिंग की रफ्तार पड़ी धीमी 

देशभर में अचानक कोविड मामलों में वृद्धि के साथ ही तीसरी लहर को लेकर आशंका बढ़ गई है। लिहाजा अब केंद्र से लेकर राज्य सरकार इसके तहत जरूरी कदम उठाने की कवायदों में जुट गई है। इसी बीच कोरोना टेस्टिंग को लेकर एक डेटा सामने आया है। इस डेटा से पता चलता है कि केरल राज्य में केसेज बढ़ने के साथ ही टेस्टिंग पर भी जोर बढ़ा दिया गया है। वहीं अन्य राज्य भी टेस्टिंग को लेकर गंभीर हो गए है। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि टेस्टिंग के इस डेटा में राजस्थान सबसे निचले पायदान पर नजर आ रहा है।

राजस्थान पहुंचा निचले पायदान पर
रिपोर्ट के अनुसार केरल में जहां सात दिन में औसतन प्रति मिलियन 4,587 कोरोना टेस्ट हुए हैं। वहीं इस धुरी में राजस्थान दूसरे छोर पर नजर आ रहा है। यहां केवल 378 परीक्षण प्रति मिलियन टेस्ट ही पाए गए हैं। इसी तरह टेस्टिंग में पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात सभी 1,000 प्रति मिलियन से नीचे है। मिली जानकारी के अनुसार अधिकांश बड़े राज्यों में औसत प्रति मिलियन 3,000 से कम टेस्ट देखने को मिले हैं। हालांकि इस मामले में दिल्ली और असम अपवाद के रूप में दिखाई दे रहे हैं। यहां क्रमशः 3,563 और 3,336 टेस्ट हुए है। छोटे राज्यों (एक करोड़ से कम आबादी वाले) में, मिजोरम ने 1 अगस्त तक सात दिनों में (सबसे ज्यादा) औसत 4,916 प्रति मिलियन की दर से कोरोना टेस्ट के आंकड़े दर्ज किए है, जो केरल की तुलना में थोड़ा अधिक है।

राजस्थान में 10 हजार से ज्यादा का कोविड लक्ष्य हासिल किया जा चुका
जानकारों की माने तो राजस्थान में कोरोना टेस्टिंग को लेकर पहले काफी अच्छी तरह से ध्यान दिया जा रहा है। राजधानी जयपुर में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 10 हजार तक के टेस्टिंग लक्ष्य को पूरा किया जा रहा था। मुख्यमंत्री के निर्देश केे बाद सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर कोविड टेस्टिंग की जा रही था, लेकिन प्रदेश में कोरोना संक्रमण घटने के साथ ही डोर टु डोर सर्वे और कोविड टेस्टिंग की रफ्तार भी धीमी हो गई है।

वैक्सीनेशन की रफ्तार पर भी पड़ा असर
उल्लेखनीय है कि राजस्थान उन राज्यों में शुमार है, जहां पहले तेजी से वैक्सीनेशन कर ढाई करोड़ से ज्यादा लोगों का टीकाकरण किया गया। लेकिन वैक्सीन की आवक कम होने के साथ ही अब वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी होती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान में तेजी से चले वैक्सीनेशन की बदौलत ही यह स्थिति सामने आई कि .यहां 76 प्रतिशत से ज्यादा लोगों की एंटीबॉड़ी डवलप होने की बात सामने आई।
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