कृष्ण जन्मभूमि केस में पक्षकार बनने की सभी याचिकाएं कोर्ट में खारिज

मथुरा में कृष्ण मंदिर (Krishna janmbhumi) के बगल में बने मस्जिद (Mathura Masjid) को हटाने के लिए अक्टूबर 2019 में दी गई याचिका को मथुरा कोर्ट (Mathura court) ने स्वीकृत किया था। यह याचिका बाल देवता भगवान श्रीकृष्ण विराजमान (Krishna birth place) की ओर से रंजना अग्निहोत्री और अन्य पांच लोगों ने दायर की थी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक और शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दायर अपील के रिवीजन के तौर पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने गुरुवार की तारीख दी थी, लेकिन कोर्ट ने इसकी सुनवाई के बजाय मामले में पक्षकार बनने के लिए पहले से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की और सभी को ख़ारिज करने का फैसला सुनाते हुए रिवीजन केस की सुनवाई के लिए 22 मार्च की तारीख तय कर दी।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रपौत्री ने भी दी थी याचिका
जन्मभूमि से सटे 17वीं सदी की ईदगाह मस्जिद को हटाने के मुकदमे में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रपौत्री और हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजश्री चौधरी ने भी पक्षकार बनने की कोर्ट में अपील दी थी। राजश्री चौधरी ने दावा किया था कि 'कृष्णजन्मभूमि के बगल में बना ईदगाह अवैध है। केवल इतना ही नहीं, हमारे एजेंडे में अभी काशी विश्वनाथ, तेजो महल भी है।'
जन्मभूमि से सटे 17वीं सदी की ईदगाह मस्जिद को हटाने के मुकदमे में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रपौत्री और हिंदू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजश्री चौधरी ने भी पक्षकार बनने की कोर्ट में अपील दी थी। राजश्री चौधरी ने दावा किया था कि 'कृष्णजन्मभूमि के बगल में बना ईदगाह अवैध है। केवल इतना ही नहीं, हमारे एजेंडे में अभी काशी विश्वनाथ, तेजो महल भी है।'
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